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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

ऊजल कपड़ा पहरि करि, पान सुपारी खाँहि। एकै हरि का नाँव बिन, बाँधे जमपुरि जाँहि॥

Kabir 12.53

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―जो व्यक्ति श्वेत स्वच्छ वस्त्र धारण कर पान सुपारी खाकर अपना जीवन व्यतीत करते रहते हैं वे एक ईश्वर के नाम-स्मरण के बिना यमपुर के बंधनो मे जकड दिए जाते हैं।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―ईश्वर के नाम स्मरण के बिना जीवको यमपुर की यातनाये भुगतनी पड़ती हैं।