―कबीरदास जी कहते हैं कि हे जीव! तू राम नाम का स्मरण करते हुए अपनी गरीबी मे हो प्रसन्न रह। भवसागर मे डुवाने वाले मिथ्या सासारिक वैभवो मे यदि तू पड गया तो भविष्य मे तेरे ऊपर भारी विपित्त आवेगी और निश्चित रूप से तेरा पतन होगा।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर केवल राम कहि, सुध गरीबी झालि। कूड़ बड़ाई कूड़सी, भारी पड़सी काल्हि॥
Kabir 12.51
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
―झाल्हि=झेलने। कूड=व्यर्थं के, मिथ्या।