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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

संदर्भ―मृत्यु संपूर्णं वैभवो को नष्ट कर देती है। कबीर थोड़ा जीवडाँ, माड़े बहुत मॅगण। सबही ऊभा मेल्हि गया, राव रंक सुलितान॥

Kabir 12.5

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Sūtra Translation

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―कबीर दास भी कहते है कि यह उनसे हुए भी कि जीवन क्षणिक है मनुष्य मानन्वोत्मास के वनेकानेक उपकरण डटाना रहता है और कठोर पर माल के द्वारा यह क्षण भर मे ही नष्ट कर दिया जाता हैं। राजा सब इस समार मे विदा हो जाता है। ​⁠शब्दार्थ―माँड़े बहुत मँडाण=बडे ठाट-बाट बाँध दिए। उभा=खड़ा। मेल्हि गया=नष्ट हो गया।