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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कहत सुनत जग जात है, विषै न सूजो काल। कबीर प्यालै प्रेम कै, भरि भरि पिवै रसाल॥

Kabir 12.49

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Sūtra Translation

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इस संसार के सभी प्राणी माया से मुक्त होने का उपदेश देते और सुनते हुए भी एक-एक कर उसी विषय वासना के मार्ग पर चलते जाते है उनमें उन्हें अपना विनाश दिखाई ही नहीं देता किन्तु कबीर ऐसे साधु व्यक्ति प्रभु-प्रेम सर के प्यालों को भर-भर कर पी रहे हैं और अमित आनन्द की प्राप्ति कर रहे हैं।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

विषै = विषय वासना।