जो व्यक्ति कुल की मर्यादा आदि के प्रपंचो को लेकर चला वह सांसारिक भ्रमो का शिकार होकर मर गया। मृत्यु हो जाने पर जब शव को ले जाकर श्मशान की अपवित्र भूमि मे रख दिया जाता है तब किसका कुल लज्जित होता है? अर्थात् किमी का नहीं।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
दुनिया के धोखै मुवा, चलै जु कुल की काणि। तब कुल किसका लाजसी, जब ले धर्या मसांणि॥
Kabir 12.46
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―जीव ने यदि प्रभु-भक्ति, साधु सेवा आदि सुकृत्य किये होते तो उसका नाश न होता।
Padārtha — Word-meaning
―काणि मर्यादा, गौरव। लाजसी=लज्जा करता है। मसाणि=इमशान।