―सासारिक वैभवो का त्याग करके ही सार तत्व ब्रह्म की प्राप्ति संभव है और यदि सासारिक वैभवो की ही रक्षा का प्रयास किया गया तो ईश्वर-प्राप्ति असम्भव है इसलिए हे जीव।तू सांसारिक आकर्षणो से विरक्त होकर ब्रह्म से मिल ले क्योकि सारा संसार उसी मे समाया हुआ है। विशेष―कुल के दो अर्थ होने से यमक अलंकार।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कुल खोयां कुल ऊबरै, कुल राख्याँ कुल जाइ। राम निकुल कुल मेंटि लै, सब कुल रह्या समाइ॥
Kabir 12.45
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
माया जन्य आकर्षणो को भुलाकर ही ब्रह्म प्राप्ति संभव है।
Padārtha — Word-meaning
―कुन=सासारिक वैभव। कुल=सारतत्व प्रभु। निकुल=कुल रहित होकर, सासारिक प्रलोभनो से विरक्त होकर। कुल=समस्त आनंद के साधन।