Sant Seva ParishadSant Seva ParishadSSP · sant seva

Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

यहु तन तौं सब वन भया, करंम भए कुहाड़ि। आप आप कूँ काटि हूँ, कहै कबीर विचारि॥

Kabir 12.44

Audio
Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

यह सम्पूर्ण शरीर वन के समान है और उसको काटने के लिए जीव के कर्मों की कुल्हाड़ी प्रस्तुत है। कबीर दास जी विचार कर कहते है कि जीव ​अपने कर्मों की कुल्हाड़ी से अपने ही शरीर को काट रहा है। जीवन को नष्ट कर रहा है। विशेष―(१) तुलना कीजिए― “कोउ न कहु सुख दुख कर दाता। निज कृत कर्म भोग सुनु भ्राता॥" (२) रूपक अलंकार। शव्दार्थ―कुहाडि=कुल्हाडा।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

कर्मों का फल जीव को भोगना नहीं पड़ता है।