जीवात्मा ने सांसारिक माया आकर्षणों में लिप्त रह कर प्रभु को भुला दिया किन्तु मरने पर वह सांसारिक प्रलोभन एक भी जीव के साथ नहीं जाते हैं। इस प्रकार जीवात्मा ने गाफ़िल होकर स्वयं अपने पैरों में कुल्हाड़ी मार ली है अपनी उन्नति का मार्ग अवरुद्ध कर लिया है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
दीन गंवाया दुनीं सौ, दुनी न चाली साथि। पाँइ कुहाड़ा मारिया, गाफिल अपणै हाथि॥
Kabir 12.43
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
संसार के आकर्षण भरते समय नहीं काम देते हैं उस समय तो प्रभु-भक्ति ही काम देती है।
Padārtha — Word-meaning
दीन = धर्म। दुनी = दुनियाँ।