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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

संदर्भ―सासारिक तापो को औषधि एक मात्र प्रभु भक्ति ही है। कबीर अपने जीव तैं, ऐ दोइ वार्तें धोइ। लोभ बढ़ाई कारणैं, अछता मूल न खोइ॥

Kabir 12.41

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

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कबीर दास जी कहते हैं कि हे जीव! तू अपने मन से दो बातों को बिल्कुल निकाल दे एक तो लोभ और दूसरे आत्म-प्रशसा से उत्पन्न अहंकार। इन्हीं दो वस्तुओं के कारण अपने अमूल्य धन परमात्मा को मत खो।

Padārtha Word-meaning

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जीवतैं = मन से। अछता = पास का।