―जिस प्रकार कुम्भकार का कच्चा घडा कुम्भकार की थपकी की चोट खाता रहता है उसी प्रकार यह शरीर भी सासारिक यातनाओ को सह रहा है। केवल राम नाम के अवलम्ब के बिना यह जव तब संसार में जन्म लेकर नाना प्रकार के कष्ट पाता है। विशेष:―रूपक अलंकार।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
यह तनु कांचा कुंभ है, चोट चेहूँ दिसि खाइ। एक राम के नांव बिन, जदि तदि प्रसै जाई॥
Kabir 12.38
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
जदि तदि=जब तत्र।