फबीर दास जी कहते हैं कि यह शरीर व्यर्थ में ही नष्ट होता जा रहा है अब भी यदि इसका उद्धार करना चाहो तो अच्छे कर्मों में प्रवृत्त करो संसार में माया के पीछे बावला बना क्यों फिरता है जिनके पास लाखों और करोड़ों की सम्पदा थी वह भी मृत्यु के समय खाली हाथ ही यहाँ से ले गये। विशेष—(१) दृष्टान्त अलंकार। (२) तुलना कीजिए। इकट्ठे गर जहाँ जर सभी मुल्कों के माली थे। सिकन्दर जय चलां दुनिया से दोनों हाथ गाली थे।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर यह तन जात है, सकै तौ लेहु बहोड़ि। नागे हाथूँ ते गये, जिनकै लाख करोड़ि॥
Kabir 12.37
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
परलोक का ध्यान रखना जीवात्मा का परम लक्ष्य है।
Padārtha — Word-meaning
बहोहि = बहोरि = पुनः। नामे = ना ही।