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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर यहु तन जात है, सकै तौ ठाहर लाई। कै सेवा करि साधकी, कै गुण गोबिन्द के गाइ॥

Kabir 12.36

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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कबीर दास जी कहते हैं कि यह शरीर नश्वर हैं शीघ्र ही नष्ट हो जाने वाला है अतः यदि तु इसे उचित कार्य में लगा सके तो लगा ले। या तो तू साधुओं की सेवा में अपने मन और शरीर को लगा दे या फिर परमात्मा के गुणानुवाद कर ताकि तेरा परलोक सुधर जाय। विशेष—तुलसी ने भी लिखा है कि— "बिनु सत्संग विवेक न होई। राम कृपा बिन सुलभ न सोई॥" —मानस

Bhāṣya Commentary

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जीव को प्रभु भक्ति और सत्संगति करनी चाहिए।

Padārtha Word-meaning

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ठाहर लाइ = उचित कार्य में लगाना।