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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर हरि की भगति करि, तजि विषिया रस चोज। बार-बार नहीं पाइये, मनिषा जन्म की मौज॥

Kabir 12.35

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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―कबीर का कहना है कि मानव जन्म-प्राप्ति का सौभाग्य वारम्बार प्राप्त नहीं होता अतः हे जोवात्मा। विषय वासना युक्त माया पूर्ण क्षणिक ​आनन्द और सुखों का परित्याग कर प्रभु भक्ति मैं प्रवृत्त होगा बड़ी वास्तविक आनन्द है।

Bhāṣya Commentary

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―मानव जन्म के बार-बार न मिल पाने के कारण जीव को ईश्वर स्मरण मे समय व्यतीत करना चाहिए।

Padārtha Word-meaning

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रस चोज = आनन्दोल्लास।