कबीर दास जी कहते हैं कि यह मानव जन्म बडी कठिनाई से प्राप्त होता है और यह शरीर बारम्बार नही प्राप्त होता है। जिस प्रकार एक बार वृक्ष से फल गिर जाने के बाद उसी शाखा में फिर से नहीं लग सकता उसी प्रकार मनुष्य देह भी दुबारा नहीं मिल पाती है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
मनिषा जनम दुर्लभ है, देह न बांरम्बार। तरवर थै फल झड़ि पड़्या, बहुरि न लागै डार॥
Kabir 12.34
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―मनुष्य का जन्म बार-बार नही प्राप्त होता है।
Padārtha — Word-meaning
―मनिषा=मानव का।