हे जीवात्मा! तुमने राम नाम का स्मरण नहीं किया। सेना के समान छपने कुटुम्ब के पालन मे ही ‘जूझता रहा। इस प्रकार सांसारिक झझटो मे उलझते हुए जीवन का अंत हो गया किन्तु अहंकार से मुक्ति फिर भी न मिली।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―मनुष्य को अपनी शक्ति संसार के व्यर्थं कार्यों मे नष्ट न कर प्रभु भक्ति मे ध्यान लगाना चाहिए। राम नाम जाण्याँ नहीं, पाल्यो कटक कुटुम्ब। धन्धा ही में मरि गया, बाहर हुई न बम्ब॥
Kabir 12.33
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―सासारिक झझटो मे जीवन का अन्त हो जाता है किन्तु अहंकार के कारण राम नाम का स्मरण नहीं हो पाता है।
Padārtha — Word-meaning
―कटक=सेना। बंब=नगाड़ा, यहाँ अहं से तात्पर्य है।