―हे जीवात्मा! तूने राम नाम के तत्व को नहीं जाना और इस प्रकार जड़ से हो बात को बिगाड़ दिया। व्यर्थं के सासारिक धन्धो मे तू यहाँ पर ईश्वर को ही हार गया अब मरने के अवसर पर तेरे मुख मे धूलि के अतिरिक्त और क्या हो सकता है?
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
राम नाम जांण्यां नहीं, बात विनंठा मूल। परत ढूंढ़ा ही हारिया परति पड़ी मुख धूलि॥
Kabir 12.32
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Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
विनेटी=नष्ट कर दी।