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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

राम नांम जांण्यों नहीं, लागी मोटी पोड़ि। काया हाँडी काठकी, ना ऊँ चढ़ै बहोड़ि॥

Kabir 12.31

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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जीवन भर राम नाम के महत्व को नहीं जाना। सांसारिक प्रपंचो की मोटी तह जमा हो गई जिस प्रकार काठ की हाँडी एक ही बार चढ़ाई जा सकती है दुबारा वह चढ़ाने योग्य नहीं रह जाती है उसी प्रकार यह शरीर भी दुबारा प्राप्त नहीं हो सकता है।

Bhāṣya Commentary

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मनुष्य जीवन बार-बार नहीं मिलता अतः प्रभु-भक्ति इसी जीवन में कर लेनी चाहिए।

Padārtha Word-meaning

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पोड़ि = दोष। बहोड़ि = बहिरंग = पुनः, दूसरी बार।