इस मनुष्य योनि में जिस व्यक्ति को चेत नहीं आया, परलोक को सुधारने की चेष्टा नहीं की और पशुओं के समान देह को ही पालता रहा अर्थात् पाशविक प्रवृत्तियो में ही लगा रहा। जीवन भर राम के महत्व को न पहिचान पाने के कारण अन्त समय में तुझे नष्ट होकर मिट्टी में मिल जाना पढ़ेगा।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
इहि औसरि चेत्या नहीं, पसु ज्यूं पाली देह । राम नाम जांण्यां नहीं, अंति पड़ी मुख पेह॥
Kabir 12.30
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
मनुष्य योनि में जो अपने को मुक्त न कर सका उसका जीवन ही नष्ट हो जाता है।
Padārtha — Word-meaning
पेह = मिट्टी, धूल।