―जिन मनुष्यों ने इस संसार मे आकर ब्रह्म के प्रति भी विश्वासघात किया है उसके गुरगो को भूल जाते हैं। उन्हों को विधाता बगुले का जन्म दे देता है जो लज्जावध अपना मुख नीचा किये खडे रहते है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
जिहि हरि की चोरी करी, गये राम गुण भूलि। ते बिधना बागुल रचे, रहे अरघ मुखि भूलि॥
Kabir 12.28
Audio
Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―प्रभु भक्ति के बिना जीवन व्यर्थं होता है।