―इस संसार मे आकर जो व्यक्ति नाना प्रकार के सासारिक आकर्षणो मे आकर पड़ जाते हैं वह संसार मे आकर भी न आने के समान मृत तुल्य है। वह भ्रम मे पड़ा हुआ बेहोश है और दुष्ट बुद्धि पराजित हो चुके हैं। शव्दार्थ―अण आया=न आने के समान। भुलांवा=भ्रम मे। कुवुषी =बुरी बुद्धि।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
आया अण आया भया, जे बहुरता संसार। पड़्या भुलांवां गाफिला, गये कुबधी हारि॥
Kabir 12.26
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
जो व्यक्ति संसार मे आकर माया के आकर्षण मे ही पड़े रहते हैं उनका जीवन व्यर्थं हो जाता है।