कबीर दास जी कहते है कि हमने इस संसार में आकर आत्मा की मुक्ति के लिए कौन-कौन से कर्म किए हैं जिनको कि मरने के बाद ईश्वर के अमृत्व वतलायेंगे। हमने न तो ऐसे कर्म किये हैं जिनसे इम लोक का जीवन सुधरता और न ऐसे सत्कर्म किए हैं कि परलोक का मार्ग हो सुधरता। अतः हम तो कही के न हुए जो पवित्र आत्मा परमात्मा से प्राप्त हुई थी वह भी गँवा बैठे।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कहा कियौ हम आइ करि, कहा कहेंगे जाइ। इत के भये न उतके, चाले मूल गँवार॥२॥५
Kabir 12.25
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
जीव दम संसार में आकर परलोक सुधारने के कर्म कम करता है।