Sant Seva ParishadSant Seva ParishadSSP · sant seva

Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर सुपनै रैनि कै, उघड़ि आए नैन। जीव पड्या बहु लूटि मैं, जागै तो लैंण नदैण॥

Kabir 12.22

Audio
Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

कबीरदास जी कहते हैं कि जीवात्मा के अज्ञान रूपी रात्रि में सोते-सोते सहसा नेत्र खुल गये। सुप्तावस्था में वह नाना प्रकार के लेन देन में पड़ा हुआ था और जागने हो (ज्ञान प्राप्त होते ही) यह संसार के लेन देन से मुक्त हो गया।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

अज्ञान के कारण ही जीव माया के भ्रम में पड़ा रहता है किन्तु ज्ञान रूपी जागृति होने पर वह माया के बन्धन से मुक्त हो जाता है।