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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर जे घन्घै तौ घूलि, बिन घघै घूलै नहीं। तैं नर बिनहे मूलि, जिनि, घंघै मै ध्याया नहीं॥

Kabir 12.21

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

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―कबीर का कहना है कि जो मनुष्य इस संसार मे सत्कर्मों में प्रवृत्त रहते हैं उनकी आत्मा स्वच्छ हो जाती है क्योकि बिना कर्मों के आत्मा स्वच्छ नहीं हो सकती। वे मनुष्य तो जाते ही नष्ट हो गये जो इस संसार मे कर्मों मे वृत्त होते हुए ईश्वर का स्मरण नहीं करते। शव्दार्थ―घघै=कर्म। घूलि=घुलना। विन=नष्ट हो गये।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

प्रभु प्राप्ति संसार मे रहकर ही सम्भव है।