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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर धूलि सकेलि करि, पुड़ी ज बाँधी एह। दिवस चारि का पेषणां अन्ति षहे की षहे॥

Kabir 12.20

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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―कबीर दास जी कहते हैं कि यह मानव शरीर धूल को इकट्ठा करके पुडिया के समान बाँध दिया गया है। इसकी साज-सज्जा कुछ ही दिनो की है और अन्त मे यह जिस मिट्टी से बना है उसी मिट्टी के रूप में परिवर्तित हो जाएगा।

Bhāṣya Commentary

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―रूपक के द्वारा शरीर की क्षण भंगुरता के प्रति सकेत है।

Padārtha Word-meaning

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―सकेलि=एकत्रित कर। पुडी=पुडिया षहे=धूल।