―जिन लोगो के दरवाजो पर सदैव वैभव सूचक नगाडे बजा करते थे और मदमस्त हाथी घूमा करते थे। वे वैभवशाली लोग भो ईश्वर के एक नाम के विना अपने जीवन को ससार मे व्यर्थं हो खो बैठे।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―शरीर क्षण भंगुर है। वैभव थोडे दिन का ही है अंत मे शरीर के साथ वह भी नष्ट हो जायगा। जिनके नौवति वाजती, मैंगल बॅधते बारि। एकै हरि के नावै विन, गए जन्म सब हारि॥
Kabir 12.2
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
―मैगल=मदमस्त हाथी।