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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

दिवस चारि का पेषणां, विनस जाइगा काल्हि॥

Kabir 12.19

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―कबीर दास जी कहते हैं कि यह शरीर रूपी मंदिर लाख का बना हुआ है इसमे हीरे और लाल जड़े हुए हैं यह देखने मे बहुत आकर्षक है किन्तु इसका यह आकर्षण शीघ्र ही नष्ट हो जायेगा और यह (पाण्डवो के) लाक्षा गृह के के समान जलकर नष्ट हो जाएगा। शव्दार्थ―लाष=लाक्षा, लांख।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―शरीर की साज सज्जा चन्द दिनो की है उसके बाद यह नष्ट हो जायेगा।