कबीरदास जी कहते हैं कि सैकड़ों बार काम क्रोधादि रूपी चोरों ने इस शरीर रूपी मकान में सेंध लगाई है। जिसके कारण यह पूर्ण रूप से दह कर गिर गया है। इसको चुनकर बनाने वाला कारीगर एक बार तो बना गया किन्तु दुबारा बनाने के लिए वह नही मिला।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर मन्दिर ढहि पड़या, सैंट भई सैंबार। कोइ चेजारा चिणि गया, मिल्या न दूजी बार॥
Kabir 12.17
Audio
Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
चेजारा = चुनने वाला, राज।