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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

हाड़ जलै ज्यूं लाकड़ी; केस जलै ज्यूँ घास। सब तन जलता देखि करि, भया कबीर उदास॥

Kabir 12.16

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

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कबीर दास जी कहते हैं कि मरणोपरान्त इस शरीर की हड्डियाँ लकड़ी की भाँति और केश घास की तरह चिंता के ऊपर जलते हैं। इस प्रकार समस्त शरीर को जलता हुआ देखकर कबीर दास यह समझकर कि इस जीवन में कुछ नहीं है इससे विरक्त हो गये।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

शरीर की क्षण भंगुरता देखकर कबीर को विरक्ति हो गयी है।