कबीरदास जी कहते हैं कि हे मनुष्य! तू जीवन मरण (आवागमन) को गम्भीरतापूर्वक विचार कर वासना जन्य कुकर्मों का परित्याग कर दे। जिस प्रभु-भक्ति के मार्ग पर तुझे अंततः चलना है तू उसे अभी से अपना ले।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
जांमण मरण विचारि करि, कूड़े कांम निबारि। जिनि पँथूँ तुझ चालणं, सोई पंथ सॅवारि॥
Kabir 12.14
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
―जामण=जन्म। कूडे-बुरे। चाल=चलना है। सँवारि=संभाल ले।