कबीरदास जी कहते हैं कि यह संसार उसी प्रकार है जिस प्रकार सेमर के फूल। सेमर का फूल ऊपर से ही आकर्षक होता है भीतर उसमे कोई तत्व नही होता है। इस थोड़े दिन के जीवन मे इसके झूठे दिखावे मे मनुष्य को अपनी वास्तविकता को नहीं भूल जाना चाहिए।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―मृत्यु एक न एक दिन सभी को नष्ट कर देती है अतः मनुष्य की गर्व नही करना चाहिए। यहु ऐसा संसार है, जैसा सैंबल फूल। दिन दस के व्यौहारको झूठै रंगि न भूलि॥
Kabir 12.13
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
सेमर की फूल की भाँति इस नश्वर संसार पर गर्व करना उचित नही है।
Padārtha — Word-meaning
सैंवल=सेमर का पुष्प। झूठै रगि=झूठे आकर्षण। विशेष= उपमा अलंकार।