कबीरदास जी कहते हैं कि चर्म से ढंकी हुई हड्डियों के सौन्दर्य पर गर्व करना ठीक नहीं है। जो लोग श्रेष्ठ पीढ़ी पर बैठकर और सिर पर छत्र धारण कर चलते हैं वे भी एक दिन कब्र में चले जाते हैं।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ—सांसारिक ऐश्वर्य पर गर्व नहीं करना चाहिए। कबीर कहा गरबियों, चाँम पलेटे हड्ड। हैं वर ऊपर छत्र सिरि, ते भी देवा खड्ड॥
Kabir 12.11
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
है वर (हव + यर) श्रेष्ठ घड़ा देवा = दिए जायेंगे।