कबीरदास जी कहते हैं कि ऊँची-ऊँची अट्टालिकाओं को देखकर उस पर गर्व नही करना चाहिए। जीव यह नहीं जानता कि शीघ्र ही उसे कब्र में लेटना पड़ेगा और कब्र के ऊपर घास उग आएगी तेरा सारा वैभव नष्ट हो जायेगा।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ—शरीर को छोड़ने के बाद आत्मा उसमें प्रविष्ट नहीं होती इसलिए जीव को गर्व नहीं करना चाहिए। कबीर कहा गरबियौ, ऊँचे देखि अवास। काल्हि परयू म्वै लेटणां, ऊपर जामें घास॥
Kabir 12.10
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
प्रवास = घर। म्बै = भू = पृथ्वी पर।