―कबीर दास जी कहते हैं कि इस क्षण भंगुर संसार में अपने वैभव का प्रदर्शन थोड़े ही दिन किया जा सकता है। फिर काल जब मृत्यु के मुख्य मे शरीर को सुला देता है तो नगर, बाजार गली कही भी इसके दर्शन नही हो सकेंगे।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर नौबति अपणीं, दिन दस लेहु बजाइ। ए पुर पटन ए गली, बहुरि न देखौ आइ॥
Kabir 12.1
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
―चितावरणी=चेतावनी। नौबत=नगाडा।